जय कृष्ण मनोहारिणी, जय वृंदावन प्रिया।
जय भ्रू-मंगल ललिता, जय वेणु-रवा कुला॥ 📿

रहस्य जो आपको झकझोर देगा:
इस मंत्र में 'भ्रू-मंगल' का अर्थ है श्री राधा जी की भौंहों का सूक्ष्म इशारा। निकुंज में संपूर्ण ब्रह्मांड का संचालन और दिव्य रास का प्रवाह किशोरी जी की आँखों के एक छोटे से इशारे मात्र से होता है!


जब आप इस मंत्र को गाते हैं, तो आपको कृष्ण को ढूंढना नहीं पड़ता, बल्कि राधा नाम के प्रभाव से स्वयं पूर्ण पुरुषोत्तम श्री कृष्ण आपको ढूंढते हुए आपके जीवन में जाते हैं।

परम सुख और मानसिक शांति के लिए इस दिव्य मंत्र को आज ही अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
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राधे राधे 🦚

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