सावन 2026: शिवपुराण के अनुसार जानें भगवान शिव के प्रिय फूल, किस पुष्प से पूरी होगी कौन सी मनोकामना
सनातन धर्म में भगवान शिव को 'भोलेनाथ' कहा जाता है अपने भक्तों पर बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। सावन का पावन महीना महादेव की विशेष कृपा प्राप्त करने का सबसे उत्तम समय माना जाता है। इस दौरान भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार रुद्राभिषेक और जलाभिषेक करते हैं
शिवपुराण में इस बात का विस्तृत वर्णन मिलता है कि सावन में शिवजी की पूजा करते समय यदि उन्हें उनकी प्रिय वस्तुएं और विशेष फूल अर्पित किए जाएं, तो जातक की हर अधूरी इच्छा पूरी हो सकती है। आइए जानते हैं कि किस फूल को चढ़ाने से महादेव कौन सा वरदान देते हैं:
🌸 शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव के प्रिय फूल और उनके फल:
1. धतूरे का फूल (संतान प्राप्ति के लिए)
महत्व: शिवपुराण के अनुसार, महादेव की पूजा में धतूरे के फूल का विशेष स्थान है।
फल: जो दंपत्ति संतान सुख से वंचित हैं, उन्हें सावन में शिवजी को धतूरे का फूल अर्पित करना चाहिए। इसमें भी लाल डंठल वाला धतूरा पूजन के लिए सबसे अधिक शुभ और फलदायी माना गया है
2. सफेद आक और श्वेत कमल (मोक्ष की प्राप्ति)
महत्व: सफेद रंग पवित्रता और वैराग्य का प्रतीक है, जो महादेव को अत्यंत प्रिय है।
फल: सावन के महीने में भगवान शिव को सफेद आक (मदार) और श्वेत कमल के पुष्प अर्पित करने से व्यक्ति को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है
3. करबीर (कनेर) के फूल (रोग और कष्टों से मुक्ति)
महत्व: शारीरिक व्याधियों और असाध्य रोगों से मुक्ति के लिए कनेर के फूलों से पूजा का नियम है।
फल: शिवपुराण के अनुसार, यदि कोई जातक सावन में एक लाख करबीर (कनेर) के फूलों से महादेव का पूजन या अर्चन करता है, तो उसके जीवन के बड़े से बड़े रोग, अकाल मृत्यु का भय और समस्त शारीरिक कष्ट दूर हो जाते हैं
4. चमेली और अलसी के फूल (सुख-समृद्धि और वाहन सुख)
महत्व: यह फूल भौतिक सुखों और ऐश्वर्य की वृद्धि के लिए चढ़ाए जाते हैं।
फल: सावन शिवरात्रि या सोमवार को चमेली के फूल अर्पित करने से जातक को वाहन सुख और जीवन में समृद्धि मिलती है। वहीं, अलसी के फूलों से पूजा करने पर महादेव के साथ-साथ भगवान विष्णु का भी विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है
5. हरसिंगार, मोगरा और बेल के फूल (पारिवारिक खुशहाली व दांपत्य प्रेम)
महत्व: मानसिक शांति और घर के वातावरण को सकारात्मक बनाने के लिए इन सुगंधित फूलों का प्रयोग होता है।
फल: हरसिंगार (पारिजात) और मोगरे के सुगंधित फूल महादेव और माता पार्वती को चढ़ाने से घर की दरिद्रता दूर होती है। इससे दांपत्य जीवन में मधुरता, आपसी प्रेम और गहरा विश्वास बना रहता है
6. अगस्त्य और पीला कनेर (ज्ञान, मान-सम्मान और यश की वृद्धि)
महत्व: यह फूल शिक्षा, बुद्धि और करियर में सफलता के द्वार खोलते हैं।
फल: भगवान शिव को अगस्त्य के फूल या पीले रंग का कनेर अर्पित करने से जातक को ज्ञान, गुरु की असीम कृपा और समाज में उच्च पद-प्रतिष्ठा मिलती है। इसके प्रभाव से व्यक्ति के मान-सम्मान और यश में चौतरफा बढ़ोतरी होती है
सावन में पुष्प अर्पित करते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
ताजे फूल ही चढ़ाएं: महादेव की पूजा में कभी भी बासी, सूखे या जमीन पर गिरे हुए फूल न चढ़ाएं।
वर्जित फूल: भगवान शिव की पूजा में केतकी और चंपा के फूल भूलकर भी नहीं चढ़ाने चाहिए, शास्त्रों में इन्हें पूरी तरह वर्जित माना गया है
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