सावन 2026: जानिए कब करें रुद्राभिषेक, शिववास के अनुसार शुभ दिन और वर्जित तिथियों की पूरी जानकारी :

सावन का पावन महीना देवों के देव महादेव की आराधना के लिए ब्रह्मांड का सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस मास में शिव भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए महादेव का रुद्राभिषेक (विभिन्न पवित्र सामग्रियों से शिवलिंग का अभिषेक) करवाते हैं


धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, जब हम घर पर रुद्राभिषेक करते हैं, तो भगवान शिव के निवास स्थान यानी 'शिववास' की गणना करना अनिवार्य होता है। सावन में अलग-अलग तिथियों पर शिवजी का निवास अलग-अलग स्थान पर होता है, इसलिए हर तिथि पर घर में अभिषेक करना लाभकारी नहीं होता


🌟 रुद्राभिषेक के लिए सर्वोत्तम और महाशुभ दिन :

यदि आप किसी गहरी गणना या पंचांग के फेर में नहीं पड़ना चाहते, तो शास्त्रों ने सावन मास के कुछ दिनों को"सर्वोपरि और सर्व-कल्याणकारी" घोषित किया है। इन दिनों पर शिवजी सदैव भक्तों की पुकार सुनने के लिए तत्पर रहते हैं:


सावन के सभी सोमवार: यह दिन चंद्र दोष को दूर करने और मानसिक शांति के लिए सबसे उत्तम है

सावन मास की शिवरात्रि: इस महातिथि पर किया गया अभिषेक अमोघ फल देता है

प्रदोष व्रत की तिथियां: संध्याकाल में प्रदोष के समय शिवजी प्रसन्न मुद्रा में होते हैं, जो कर्ज और संकटों से मुक्ति दिलाता है

रुद्राक्ष धारण: यदि आप इस महीने रुद्राक्ष धारण करना चाहते हैं, तो सावन का पूरा महीना बिना तिथि देखे उत्तम माना जाता है


🏡 तिथि अनुसार शिववास: कब मिलेगा कैसा फल?

जब आप अपने घर या प्रतिष्ठान में रुद्राभिषेक की योजना बनाएं, तो पंचांग में तिथियों के अनुसार शिवजी के स्थान को देखकर दिन का चयन करें:


1. माता पार्वती के साथ वास (सुख-समृद्धि के लिए)

तिथियां: कृष्ण पक्ष की अष्टमी व अमावस्या और शुक्ल पक्ष की द्वितीया व नवमी तिथि।

फल: इन दिनों भगवान शिव माता पार्वती के साथ सुखपूर्वक निवास करते हैं। इस समय अभिषेक करने से घर-परिवार में सुख, शांति, लक्ष्मी का वास और अखंड समृद्धि आती है


2. कैलाश पर्वत पर वास (आनंद और खुशहाली के लिए)

तिथियां: कृष्ण पक्ष की चतुर्थी व एकादशी और शुक्ल पक्ष की पंचमी व द्वादशी तिथि।

फल: इन तिथियों पर महादेव अपने परम धाम कैलाश पर्वत पर विराजमान होते हैं। इस समय रुद्राभिषेक कराने से पारिवारिक क्लेश दूर होते हैं और परिवार में खुशियां बनी रहती हैं


3. नंदी पर सवार होकर भ्रमण (विशेष मनोकामना पूर्ति के लिए)

तिथियां: कृष्ण पक्ष की पंचमी व द्वादशी तिथि और शुक्ल पक्ष की षष्ठी व त्रयोदशी तिथि।

फल: इन पावन तिथियों पर भगवान शिव माता पार्वती के साथ नंदी पर सवार होकर पृथ्वी लोक का भ्रमण करते हैं इस समय किया गया रुद्राभिषेक आपकी बरसों पुरानी अधूरी इच्छाओं और विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति करवाता है


⚠️ वर्जित तिथियां: जब भूलकर भी घर पर न करें अभिषेक :

शास्त्रों के अनुसार, इन विशेष तिथियों पर महादेव अन्य कार्यों में लीन या व्यस्त होते हैं, इसलिए इस समय घर पर उनका आह्वान करना प्रतिकूल फल दे सकता है:


1. जब शिवजी क्रीडारत हों (खेलने में व्यस्त)

तिथियां: कृष्ण पक्ष की तृतीया व दशमी तिथि और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी व एकादशी तिथि।

कारण व फल: इस समय भगवान शिव क्रीड़ा में मग्न होते हैं। ऐसे में उनका ध्यान भंग करके अभिषेक करने से संतान को कष्ट बढ़ता है और संतान पक्ष से परेशानियां आ सकती हैं


2. जब शिवजी देवताओं की सभा में हों (समस्याएं सुन रहे हों)

तिथियां: कृष्ण पक्ष की द्वितीया व नवमी तिथि और शुक्ल पक्ष की तृतीया व दशमी तिथि।

कारण व फल: इन दिनों महादेव देवताओं की फरियाद और उनकी समस्याओं को सुनने में व्यस्त होते हैं। इस समय किए गए रुद्राभिषेक से जातक को अपने निजी कष्टों से मुक्ति नहीं मिल पाती है


3. जब शिवजी भोजन कर रहे हों

तिथियां: कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी व सप्तमी तिथि।

कारण व फल: शास्त्रों के अनुसार इन तिथियों पर भगवान शिव भोजन ग्रहण करते हैं। भोजन काल के समय शिवजी का आह्वान करना और उन पर जल या अन्य सामग्री चढ़ाना वर्जित माना गया है


✨ संकट नाशक विशेष स्थिति: श्मशान वास

तिथियां: कृष्ण पक्ष की सप्तमी व चतुर्थी और शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा, अष्टमी व पूर्णिमा तिथि।

विशेष फल: इन तिथियों पर शिवजी श्मशान में समाधिस्थ रहते हैं। यदि कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो या अकाल मृत्यु का भय हो, तो इस दिन भगवान शिव का आह्वान करके अभिषेक करने से मृत्युतुल्य कष्ट दूर हो जाता है और आरोग्य की प्राप्ति होती है।


यह 'शिववास' देखने का कड़ा नियम केवल और केवल घर पर किए जाने वाले रुद्राभिषेक के लिए लागू होता है मंदिर, नदी किनारे स्थापित शिवलिंग या किसी ज्योतिर्लिंग में जाकर रुद्राभिषेक करते हैं, तो वहां किसी भी तिथि को देखने की आवश्यकता नहीं है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग हमेशा जाग्रत अवस्था में होते हैं और वहां सावन का हर एक पल महाशुभ होता है


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