तांत्रिक सरस्वती: माँ मातंगी का रोंगटे खड़े कर देने वाला सच!

माँ मातंगी का तांत्रिक दर्शन इंसानी सोच की सीमाओं को तोड़ता है। तंत्र शास्त्र और अघोर ग्रंथों में दर्ज उनके कुछ ऐसे परम गुप्त रहस्य, जो सामान्य धार्मिक चर्चाओं में कभी सामने नहीं आते, नीचे विस्तृत रूप से दिए गए हैं

1. 'उच्छिष्ट' (जूठन) का गहरा वैज्ञानिक रहस्य
माँ मातंगी को 'उच्छिष्ट चांडालिनी' कहा जाता है। आम तौर पर हिंदू धर्म में पूजा के दौरान अशुद्धता या जूठन से दूर रहने को कहा जाता है, लेकिन माँ मातंगी की साधना में साधक को अपने मुंह में जूठा भोजन (जैसे मिश्री या पान) रखकर मंत्र जाप करना होता है

दार्शनिक आधार: तंत्र कहता है कि यह पूरी सृष्टि ईश्वर की ही 'जूठन' है जब ईश्वर ने सृष्टि बनाई, तो उनका जो अंश शेष रह गया, वही यह भौतिक संसार है। माता यह सिखाती हैं कि शुद्ध और अशुद्ध का भेद केवल इंसानी दिमाग का भ्रम है; ब्रह्म (परम सत्य) के लिए सब कुछ एक समान है इस साधना से साधक के भीतर का सामाजिक संकोच और 'भेदभाव' पूरी तरह मिट जाता है, जो अघोर पंथ में आत्मज्ञान की पहली सीढ़ी है

2. 'वाक-सिद्धि' और 'मातंगी वाक' का चरम प्रभाव
माँ मातंगी ब्रह्मांड की समस्त ध्वनियों और शब्दों की स्वामिनी हैं। तंत्र ग्रंथों के अनुसार, जब कोई साधक इनकी उच्च स्तरीय साधना पूरी कर लेता है, तो उसे 'मातंगी वाक' प्राप्त होता है।
इसका अर्थ यह है कि साधक के कंठ में स्वयं माता विराजमान हो जाती हैं वह व्यक्ति अनजाने में या हँसते-खेलते भी जो बात किसी के लिए कह दे, वह पूरी तरह सच हो जाती है
प्राचीन काल में बड़े-बड़े राजा-महाराजा तांत्रिकों से केवल इसलिए डरते थे क्योंकि माँ मातंगी के साधकों के मुख से निकला आशीर्वाद या शाप कभी खाली नहीं जाता था

3. श्मशान और मातंग वन का गुप्त रहस्य
पौराणिक कथाओं में माँ मातंगी का निवास स्थान 'मातंग वन' या कदम्ब के जंगलों में बताया गया है, लेकिन उच्च तांत्रिक अभिलेखों के अनुसार, वे श्मशान की शांत राख में वास करती हैं उन्हें वनों और प्रकृति की उस Wild Energy का प्रतीक माना जाता है जो इंसानी बस्तियों के नियमों को नहीं मानती वे समाज के उन लोगों (जैसे चांडाल,अछूत,वंचित) की रक्षक हैं जिन्हें मुख्यधारा का समाज दूर रखता है तंत्र में माना गया है कि जो व्यक्ति समाज द्वारा जितना प्रताड़ित या उपेक्षित है, वह माँ मातंगी के उतना ही करीब होता है

4. सम्मोहन और वशीकरण की परम शक्ति
माँ मातंगी केवल ज्ञान की ही नहीं, बल्कि 'त्रिभुवन सम्मोहन'(तीनों लोकों को आकर्षित करने) की अधिष्ठात्री देवी हैं उनका हरा रंग (पन्ना स्वरूप) बुध ग्रह और प्रकृति के आकर्षण बल को दिखाता है इनकी साधना से साधक के चेहरे, वाणी और आंखों में एक ऐसा चुंबकीय आकर्षण पैदा होता है कि समाज का कोई भी व्यक्ति, अधिकारी या शत्रु उसके सामने आते ही सम्मोहित हो जाता है और उसकी बात मानने के लिए विवश हो जाता है। राजनीति और सामाजिक नेतृत्व के क्षेत्र में बड़े पदों पर बैठे लोग गुप्त रूप से इनकी आराधना करते हैं

5. तोते और वीणा का तांत्रिक संबंध
माता के हाथों में जो वीणा है, वह सामान्य संगीत की नहीं, बल्कि ब्रह्मांड के 'अनाहत नाद' (Cosmic Vibration) की वीणा है वह कंपन जो इस संसार को चला रहा है, वही वीणा की ध्वनि है। उनका प्रिय पक्षी तोता केवल एक जीव नहीं है, बल्कि वह इंसानी मस्तिष्क के 'Memory Center' को दर्शाता है। माँ मातंगी की कृपा से मंदबुद्धि व्यक्ति भी परम ज्ञानी और वेदों का ज्ञाता बन जाता है

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