🌿 वट सावित्री व्रत 2026 🌿

🔱 अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन का महापर्व 🔱

साल 2026 में वट सावित्री व्रत 16 मई, शनिवार को रखा जाएगा। इस बार ज्येष्ठ अमावस्या पर शनि जयंती और सौभाग्य योग का अद्भुत संयोग बन रहा है, जिससे इस व्रत का महत्व और भी बढ़ गया है। ✨

📅 शुभ मुहूर्त:
🌸 प्रातः पूजा मुहूर्त: सुबह 07:12 से 08:54 तक
🌸 अभिजीत मुहूर्त: 11:50 से 12:45 तक
🌸 व्रत पारण: 17 मई को सूर्योदय के बाद

📖 धार्मिक महत्व:
माता सावित्री ने इसी वट वृक्ष के नीचे अपने तप, बुद्धि और पतिव्रता धर्म से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। शास्त्रों के अनुसार वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का वास माना जाता है। इसलिए इसकी पूजा अखंड सौभाग्य और वैवाहिक स्थिरता का प्रतीक मानी जाती है

संपूर्ण पूजा विधि :
वट सावित्री पूजा को पूर्ण श्रद्धा और नियम के साथ करने के लिए नीचे दी गई विधि का पालन करें:

तैयारी और श्रृंगार: व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और नए या साफ वस्त्र (पीले, लाल या हरे रंग के) पहनकर सोलह श्रृंगार करें. पूजा के लिए आटा-गुड़ के गुलगुले और 14 पूड़ियां तैयार कर लें

पूजा सामग्री सजाना: एक बांस की टोकरी या थाली में धूप, दीप, घी, अक्षत (चावल), सिंदूर, फूल, मौसमी फल (जैसे आम), भीगे चने, बांस का पंखा और सुहाग की सामग्री रखें

वृक्ष का पूजन: बरगद के पेड़ (वट वृक्ष) के पास जाकर सबसे पहले जड़ में जल अर्पित करें. इसके बाद वृक्ष को तिलक लगाएं, अक्षत, सिंदूर, फूल और फल चढ़ाएं

भोग लगाना: तैयार की गई 14 पूड़ियों में भीगे हुए चने और गुलगुले रखकर उसे वट वृक्ष की जड़ में अर्पित करें

परिक्रमा और धागा बांधना: कच्चा सफेद सूत या कलावा (मौली) हाथ में लेकर बरगद के पेड़ की 7, 21 या 108 बार परिक्रमा करें और धागे को तने पर लपेटते जाएं

कथा श्रवण: परिक्रमा के बाद पेड़ के नीचे बैठकर हाथ में भीगे चने लेकर सावित्री-सत्यवान की व्रत कथा सुनें या पढ़ें. कथा समाप्त होने पर चने पेड़ पर अर्पित कर दें

सिंदूर लगाना व आरती: पूजा पूरी होने के बाद माता पार्वती और सावित्री को चढ़ाए गए सिंदूर को अपनी अनामिका उंगली से लेकर अपनी मांग में तीन बार लगाएं. इसके बाद कपूर या घी के दीपक से आरती करें

दान और पारण: घर आकर सास या किसी सुहागिन महिला को सुहाग सामग्री (साड़ी, चूड़ियां, बिंदी) और फल दान कर उनका आशीर्वाद लें. अंत में, 7 भीगे चने के दाने और बरगद की एक कोपल (नया पत्ता) पानी के साथ निगलकर अपना व्रत खोलें (पारण करें)

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